भूजल दोहन के कारण दुनिया भर में क्या जमीन धंस रही है ?
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एक #अध्ययन में अभी यह पाया गया है कि #दुनिया में #भूजल के अंधाधुन दोहन के कारण वश दुनिया भर में #पृथ्वीग्रह की जमीन दब रही है यह अध्ययन अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट आफ साइंस द्वारा किया गया है शोध के परिणाम काफी जॉब आने वाले हैं जो भी दुनिया के संभावित भूमि दशाव और क्षेत्रों में चयनित 7,343 प्रमुख शहरों में से 1,596 शहरों मतलब 22% सैंपल शहरों के अध्ययन के आधार पर है
अगर हम बात करें धरती के जल के अत्यधिक दोहन की तो उसमें कृषि सबसे आगे और यह वही धरती है जिसे ऐसे बीजों पर निर्भर रहना पड़ता है जिन से अधिक उत्पादन लेने के लिए रात दिन किसान ट्यूबेल से धरती का पानी निकालते रहते हैं या निकला जाता है जबकि हम जानते हैं भूजल अनमोल है और पृथ्वी एक ग्रह है जिसमें कि 70 प्रतिशत भाग पर जल पाया जाता है और उसमें भी 2.5% स्वच्छ जल पीने के लिए पाया जाता है और यही जल फसलों की सिंचाई में काम आता है
और चौंकाने वाली बात यह है कि इस 2.5% #स्वच्छजल जो पीने वाला जल है उसका 72% जो पेयजल है वह हमारी आधुनिक कृषि ही पी जाती है और यह वह कृषि जो #हरितक्रांति के अडानी आदानो पर अवलंबित है #पानी की कमी समय में एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है हर राष्ट्रों का आज देश के कई प्रदेश और #राजधानी #दिल्ली सहित देश के बड़े-बड़े #महानगर #जलसंकट से जूझ रहे हैं और यह जल संकट इतना विकराल है कि आने वाले समय में आदमी को खाद्य सुरक्षा तो मिल जाएगी परंतु जल सुरक्षा तो बिल्कुल नहीं है मतलब यह सीधा है की हरित क्रांति से उपजी राष्ट्रीय #खाद्यसुरक्षा आपको #जलसुरक्षा की कीमत पर है तभी आप को खाद्य सुरक्षा मिलेगी और नीति आयोग के अनुसार सुनिए- #भूजल स्थिति वाले शहरों की संख्या बढ़ रही है! अगर हम बात करें मनुष्य जीवन की तो हमारा सारा खान पान किसी से मिलने वाले उत्पादों पर ही निर्भर है और आश्चर्य की बात यह है कि प्रत्येक उत्पाद की कीमत हमें पानी से चुकानी पड़ती है और गेहूं और धान हमारी दो प्रमुख फसलें हैं जिसमें धरती का सर्वाधिक क्षेत्र आता है !
-Note- AmarUjala news
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